Devrani Jethani Ki Suhagrat | Hindi Kahani | Moral Stories.
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आज लीला के चारों बेटे शादी करके अपनी अपनी दुलहनों को अपने घर लेकर आते हैं। लीला की चार बहु घर के अंदर आती है लीला जैसे ही कमरा खोलती है उस कमरे में कुछ भी नहीं होता पूरा कमरा खाली होता है ये क्या माजी, कमरे में तो कुछ भी नहीं है हाँ माजी, हम लोग कहां सोएंगे तुम इतना सारा सामान लेकर आई हो दहेज का अपने कमरे में रखो तुम्हारे घर से तुम तीनों का बैड आया है उसे रखवा देती हूँ कमरे में लीला अपनी तीन बहु के बैड तो उस कमरे में भिजवा देती है लेकिन छोटी बहु गरीब परिवार से आई थी उसके ससुराल से एक तिल्ली भी नहीं आई थी हरे यहां तो चार बैड होने चाहिए थे ये किसका बैड कम है यहां माजी हम अपने माईके से कुछ भी नहीं लेकर आये ओ अच्छा चलो कोई बात नहीं लीला देखती है कि उसकी तीन बहु अच्छे अमीर घर से थी तो सबसे छोटी बहु गरीब थी इसी के चलते वो उससे ज़्यादा बात भी नहीं करती है तुम तीनों को अगर कोई भी परिशाने हो तो मुझे बता देना अब लीला इतना कहकर तो चली जाती है लेकिन गर्मी इतनी थी कि तीनों अमीर घर की बहु अपने अपने माई के से ससुराल में गर्मी से बचने के लिए कुछ न कुछ साधन लेकर आई थी किसी के पास पंखा होता है तो किसी के पास स्टीबल फैं तो कोई एसी लेकर आई थी लेकिन वही फुल्वा के पास अब ना तो बैट था और ना ही बिस्तर और साथ में गर्मी से बचने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं था गर्मी बहुत है और नीचे तो फर्श और भी जादा गर्म हो रहा है दीदी, क्या मैं आपके बिस्तर पर सो सकती हूँ? तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? अगर तुम मेरे पास होगी तो मैं मेरे पती के साथ सुहाग रात कैसे बनाओंगी? हाँ दीदी आपने सही कहा चलो कोई बात नहीं मैं नीजे ही बिस्तर कर लेती हूं फुलवा जमीन पर बिस्तर कर लेती है इधर तीनों अमीर बहुए अपने बेट पर अपने पतियों के साथ आराम से चैन की नीढ सो रही होती है तो इधर फुलवा अपने कमरे के आसपास देखती है उसे किताब दिखाई देती है उस किताब को उठा कर वो उस किताब से ही अपने पती को हवा करने लगती है हाथ वाला पंखा तो है नहीं इस किताब से ही हवा हो जाएगी राहुल सुहागरात मनाने की जगह सो जाता है। और इधर फुलवा इसको हवा करते करते जैसे तैसे सो जाती है। अगले दिन जब सवेरा होता है तो फुलवा की तीनों जिठानी आराम से बेड पर सो रही होती है और उठती भी नहीं है। जिठानीजी आप तीनों अभी तक सो रही हो आपको उठ जाना चाहिए आज हमारा ससुराल में पहला दिन है हमें रशोई की रसम भी पूरी करनी है अरे तुम्हें जाकर जो काम करने है करलो हम यहाँ कोई काम करने नहीं वाले हाँ हाँ इतनी गर्मी में हम कोई काम नहीं करने वाले काव्या, दिव्या, श्रेष्टी तीनों आराम से सो रही होती हैं और यहां फुलवा अपने कमरे से बाहर निकलाती है और घर के काम करना शुरू कर देती है आज तो बहुत गर्मी है, धूब भी कड़ी निकली है फुलवा सबसे पहले घर के साफ सफाई करती है इसके बाद रसोई में जाकर सभी के लिए खाना बनाने लगती है घर के सारे काम वो अकेले ही करती है उसको सारे काम करते हुए देखकर लीला कहती है लीला ऐसे कहते हुए उनके कमरे में जाती है जहां तीनों अपने बैट पर आराम से सो रही होती है हरे ये क्या बहु, अभी तक सो रही हो चल उठ जाओ, घर में और भी काम है तुम्हें देखने चाहिए माजी, आप हमें काम करने के लिए क्यों बोल रही है अरे काम करने के लिए इस घर के अंदर फुलवा है तो कुछ अपने मायके से लेकर तो आई नहीं कम से कम इसी के चलते उससे काम तो करवा लीजिये हाँ माजी घर में बहुत है आप बाहर जाओगी तो दर्वास अब बंद करते हुए जाना लीला ये सुनने के बाद कुछ कहे नहीं पाती और चुपचाप कमरे से बाहर आ जाती है यहाँ फुलवा ने सभी के लिए खाना बना लिया था माजी, चलिए नाश्ता कर लीजिये अरे वा, खाना तो बहुत ही स्वादिश लग रहा है अच्छा नाश्टा बन भी गया और घर के काम भी हो गए फुलवा तुमने अखेले गर्मी में इतने काम कैसे कर ली है मा जी मुझे घर के काम करने की आदत है बस इसलिए ऐसे ही अब घर के सारे काम फुलवा करती है गर्मी इतनी हो रही है कि नींद आती ही नहीं आजकल काम ठीक से नहीं चल रहा है जब मेरे पास पैसे एकठे हो जाएंगे तो मैं कोशिश करूँगा कि हमारा एक अलग से कमरा हो जिसमें हम आराम से कम से कम अपने सुहाग रात तो मना सकें कोई बात नहीं चलो आराम से सो जाओ मैं आपको हवा कर देती हूँ कल आपको नौकरी पर भी जाना होगा पुलवा के तीनों जठानी आराम से अपने बेट पर सो रही होती है वो अधी रात तक अपने पती को हवा करती रहती है और उसे अपने ससुराल में आकर बहुत सी परिशानियों का सामना करना पड़ता है यहां तक कि घर में जो दहेज का फ्रिज था उसमें से भी उससे ठंडा पानी नहीं मिलता माजी मैंने इसमें ठंडा पानी लगाया था अब इसके अंदर ठंडा पानी नहीं है कहा चला गया सारा पानी मुझे नहीं पता बहु वैसे भी ये फिरिज जो अपने दहेज में लेकर आया है वहीं इसे अच्छे से इस्तमाल करता है बाकी घर में कोई इस फिरिज को हाथ भी नहीं लगाता ये फिरिज मैं अपने दहेज में लेकर आई थी और तुमने इसमें पानी लगाया था तो मैंने पी लिया अपने लिए और पानी लगा लो दिव्या ऐसा कहकर चली जाती है फुलवा को दिव्या की बात बुरी लगती है लेकिन फिर भी वो नजरंदास कर देती है राहूल जी अगर हो सके तो एक मिट्टी का मटका ले आना गर्मी में साधारन पानी पिया नहीं जाता मिट्टी के मटके में जो पानी होगा वो थोड़ा सही होगा ठंडा भी और पीने में भी ठीक है शाम को मैं ले आओंगा राहूल ऐसा कहकर अपने काम पर चला जाता है शाम को वो मिट्टी का मटका लेकर आता है ऐसे ही उनके दिन बीत रहे थे एक दिन फुलवाद सबजी मंडी जाती है जहां से वो सबजीयां खरीटती है और रास्ते में एक घर वापस लोटते समय वहीं उसे एक जगह दिखाई दिया ले लूटरी को ले ज़िसकी फल देगी उसे मिलेगा अपना फल ले लूटरी का टिकट लेलो क्या सच में लोटरी काम करेगी क्या मुझे लड़ी लेनी चाहिए मेरे पास थोड़े से पैसे बचे हैं लेकिन फिर माजी को क्या जवाब दूँगी फुलवा वहाँ से थोड़ी दूर चलने के बाद आगे जाकर रुकती है और फिर वापस लोट कर उस आदमी से लॉटरी की टिकेट ले लेती है जब वो घर पर आती है तो अचानक से बेहोश ले जाती है अरे अरे ये क्या हुआ बहु? तू बेहोश हो गई अरे राहूल, राहूल कहा हो तुम जल्दी से यहाँ पर आओ लीला जब राहूल को बुलाती है तो वो फुलवा को गोधी में उठा कर घर के अंदर लेकर जाता है और डॉक्टर को भी बुलाता है इन्हें करमी से जखकर आ गए थे कोशिश करना कि इन्हें थोड़ा ठंडा वातवरण मिले घर के अंदर डॉक्टर इतना कहकर चला जाता है जिसके बाद लीला अपनी तीनों अमीर बहुँँ को बुला कर कहती है ये सब तुम तीनों की वज़े से हुआ है देख रही हो तुम तीनों ने अपनी अमीरी के घमण में इस बेचारी के उपर जरा भी ध्यान नहीं दिया और आज उसकी इतनी हालत खराब हो गई है कि वो बिस्तर में पड़ गई है तुम इतनी अमीर होने के बाद इतनी जादा खुदगर्ज होगी इसका मुझे अंदाजा भी नहीं था पूरी रात बिचारी फुलवा बिना हवा में सोती है क्या तुम्हें कभी दिखाई दिया है लीला की ये सारी बाते सुनकर तीनों बहुँओं को अपनी गलती का एहसास होता है मा जी आपने बिलकुल सही कहा हमें हमारी देवरानी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था हम ज्यादा ही सेलफिश हो गए थे और हमने फुलवा को बहुत जादा अमीरी का घमन भी दिखाया बिचारी गर्मी में घर के अंदर सारे काम करती रही और हम आराम करते रहे माजी हम माफी मांगते हैं और अब से हम ऐसी गलती दोबारा नहीं करेंगे इस तरह से उस दिन के बाद से दिव्या, काव्या और श्रिष्टी दीनों घर के सारे काम करते हैं और घर को भी संभालती हैं और यही नहीं, वो साथ के साथ फुलवा की देख रेख भी अच्छे से करती हैं दो दिन बाद जब फुलवा की तबय ठीक हो जाती है तो उसकी घर पर एक आदमी आता है और उससे कहता है मैंने जितने भी लोगों को लॉत्री का टिकेट बेचा था उनमें से किसी की लॉत्री नहीं खुली है मैं एक बार तुमारी लॉत्री का टिकेट देखना चाहता हूँ फुलवा लौटरी के टिगेट दिखाती है अब मुबारक हो, तुम्हारी लौटरी खुल गई है और तुम्हें एक बहुते बड़ा फ्लाट मिला हुआ है जिसमें बहुत सारे कमरे भी होंगे और साथ ही साथ हर कमरे में एसी लगा होगा तुम तो बहुते किसमत वाली हो ये सुनकर घर के सभी लोग बहुत खुश हो जाते हैं साथ में फुलवा भी सुना अपने राहुल जी अब हमारे पास खुद का बहुत बड़ा फ्लैट होगा और हम उसमें आराम से रहेंगे और इसी के साथ हमारी सुहाग रात भी मनेगी फुलवा बहुत खुश होती है अब फुलवा पूरे परिवार को अपने लॉटरी में निकले फलैट में ले जाती है जहां सभी के पास अपना अपना खुद का कमरा होता है और उसमें बैड, एसी, सब कुछ होता है अब पूरा परिवार एक साथ खुशे खुशी रहने लगता है और पहली बार फुलवा के सुहाग रात उसके एसी वाले कमरे में मनती है इसलिए दोस्तों कहते हैं कि तकदीर इंसान को कब कहां पहुचा दे कि किसी को नहीं पता इसलिए हमेशा अपना व्यवहार अच्छा रखें माजी, गुड मॉर्निंग, ये लीजिये चाय गुड मॉर्निंग बहु, अच्छा तूने मेरे को तो चाय दे दी अपनी देवरानी को दिया या नहीं? नहीं मां जी बस मैं देवरानी जी के कमरे में ही जाने वाली थी मैंने सोचा पहले आपको चाय दे दूं फिर उन्हें कुछ दिर बाद तमनना अपनी जेठानी से कहती है जेठानी जी, आज मुझे सैंविज खाने का बड़ा ही मन हो रहा है साथ में अगर मैगी भी मिल जाता, तो मज़ा ही आ जाता वो तो ठीक है देवरानी जी लेकिन पहले मैं सोच रही थी कि घरवालों के लिए नाश्ता तयार कर दू उसके बाद आपने जो बोला है मैं बना देती ओ मुझे पता था आप ऐसा ही बोलने वाली है खामखा ही मैंने अपना मूट खराब कर लिया इससे अच्छा तो मैं ओनलाइन ओडर कर लेती हरे बहु, तेरी मा जैसी सास के होते हुए तुझे अपना मूट खराब करने की कोई जरूरत नहीं है मुस्कान बहु, ये तुम क्या कह रही हो अगर तमन्ना ने तुम्हे कोई काम सौपा है तो पहले तुम वो करो हरे नाश्ते का क्या है हम थोड़ा लेट खा लेंगे जी माजी जैसा आप कहें इस तरह मुस्कान अपनी सास मम्ता की बात काट पाती है और वो किचन में जाकर सबसे पहले अपनी देवरानी के लिए सैंडविच और मैगी बनाती है और बनाने के बाद वो अपने देवरानी के कमरे में जाती है जहां तमन्ना ने पहले ही अपने बेट पर बहुत सारे एक्सपेंसिव ड्रेसेस फैला रखे थे हरे वा, कितने अच्छे अच्छे ड्रेस है मेरा भी मन करता है कि मैं भी ऐसी ड्रेस से लूँ और पहनूं लेकिन कोई बात नहीं वैसे क्या बात है यहां तो काफी ठंडक महसूस हो रही है अच्छा हाँ देवरानी जी के कमरे में तो एसी लगा है और मेरे कमरे में तो एक कूलर तक नहीं है ख्यार कोई बात नहीं जो जिसके नसीद में होता है उसे उतना ही मिलता है अरे तुम यहां? वैसे क्या करने आई हो मेरी कमरे में? वो आपने सेंडविच और मैगी बनाने को कहा था ना मैं बस वही लेकर आई हो अरे जब तुम लेकर आ ही गई हो तो फिर किस चीज का मौरत देख रही हो इसे क्या तुम मेरे सर पर रखने वाली हो जो तुम इसका इंतजार कर रही हो अरे साइड में रखकर जाओ यहां से जी ऐसा कहकर मुस्कान अपना मूल लटका रोते हुए अपने कमरे में जली जाती है वो किसी को अपने दिल की बात नहीं बताती लेकिन रोते हुए उसका पती हर्ष उसे देख लेता है क्या हुआ मुस्कान तुम रो क्यों रही हो ये... किसी ने तुम्हे फिर से कुछ कहा क्या? नहीं तो, किसी ने कुछ नहीं कहा. मैं रो थोड़ी रही हूँ. मेरी आखों में कुछ चला गया है. मैं समझता हूँ मुस्कान, कि तुम किस दौर से गुज़र रही हो? लेकिन अब मैं क्या करो? मैं इतना ज़्यादा नहीं कमा था कि अपने चोटे भाई से मुकाबला कर सकूँ इसी वज़य से तुम्हें घर में दब कर रहना पड़ रहा है नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है और रही बात दबने की तो परिवार में कैसा दबना और कैसा सुनना छोटी मोटी नोक जोक तो अकसर होती रहती है सच में मैं तुम्हें पाकर बहुत धन्य हो गया हूँ वैसे कल तुम कुछ कह रही थी क्या वो दरसल बात कुछ ही है कि हरची मैं अपने लिए एक ड्रेस सिलना चाहती हूँ क्योंकि माजी की anniversary आने वाली है तो मेरे पास पहनने के लिए कोई खास dress नहीं है इसलिए मैंने सूचा कि मैं खुद से ही कोई dress बना लूँ अरे वा, हाँ वैसे तुम बना सकती हो तुम्हें तो अच्छे से सिलाई भी आती है न बाकि किसी चीज में मेरी मदद चाहिए तो मुझे बता देना जी बिलकुल दर असल ये कहानी है मम्ता निवास की जहां घर की मुख्या मम्ता है और उसके दो बेटे आलोक और हर्ष हैं बड़ा बेटा हर्ष कुछ खास नहीं कमाता जिसके कारण से उसकी शादी एक गरीब लड़की मुस्कान से हो जाती है और वहीं आलोक एक MNC Company का team leader होता है जिसके कारण से उसकी शादी एक अमीर घर की लड़की तमन्ना से होती है तमन्ना काफी अमीर थी जिस वज़से उसने घमंड भी कूट कूट कर भरा था वही मम्ता की अनिवर्सरी कुछ दिन बाद आने वाला होता है जिस कारण से दोनों ही बहुए अपने ड्रेस की फिक्र करने लगती है ऐसे ही दिन गुजरते जाते हैं और एक दिन ममता अपने कमरे में अपने आप से कहती है। यार ये क्या हो गया? मुझे शाम को केटी पार्टी में जाना था। और ये मेरी ड्रेस चूहने कुछ दर दिया है। अब मैं कैसे शाम को पार्टी में जाओंगी? ऐसे तो मेरी नाग कट जाएगी। अब मैं क्या करूँ यार, इतनी जल्दी तो मुझे कोई ड्रेस भी पसंद नहीं आने वाली। अभी मम्ता इतना अपने आप से कहती ही है कि तब ही उसकी दोनों बहुएं उसके कमरे में आ जाती है। क्या हुआ माजी, आप इतनी परिशान क्यों दिखाई दे रही हैं? ये देख क्या हाल बना दिया है चूहोंने मेरी ड्रेस का, और आज ही मुझे शाम को किटे पार्टी में जाना था, अच्छा ये बात है, आप एक काम कीजिए, आप मेरी ड्रेस पहन कर चली जाईए नहीं तमन्ना बहु ऐसा नहीं हो सकता तुम्हारा और मेरा साइज बहुत अलग है और अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ माजी अगर आप गुस्सा ना करे तो मैं एक बात कहूँ हाँ हाँ अब तू भी अपना मूँ खोल ले, बता क्या कहना चाहती है। हम भी देखते हैं क्या ये कारिस्तानी करती है अगर इसने खुद का पोपट ना बना लिया तो आप मुझे कहिएगा हरे पर माजी मुझे आप बस एक मौका दीजिए मैं सच में इसे ऐसा बना दूँगी कि पूरी किटे पाटी में सब लोग आपको ही देखेंगे मैं बहुत ही अच्छी सिलाय और कढ़ाई करती हूँ मुस्कान के इतना कहने पर मम्ता उसे एक मौका ये सोच कर दे देती है कि आखिरकार ये कपड़ा तो खराब ही हो गया है इसके बाद मुस्कान उस कपड़े को अपने कमरे में ले जाती है और उसे अपने अकॉर्डिंग एक मौडल वाला लुक के साथ ड्रेस को सिलने लगती है कुछ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद वो उस ड्रेस को सिल कर तयार कर देती है और अपनी सास मम्ता को दे देती है मम्ता भी उस ड्रेस को पहन कर अपनी किती पार्टी में जाती है जहां उसकी सहेलियां उसकी बहुत तारिफ करती है वाओ यार ये ड्रेस तो सच में बहुत सुन्दर है हाँ मम्ता अगर ऐसी एक और ड्रेस मिले तो तू मेरे लिए सरूर आडर कर लियो हाँ हाँ क्यों नहीं लेकिन मैं तुम्हें बता दू कि इसे मैंने आडर नहीं बलकि बनवाया है, इसे तो मेरी बहु ने बनाया है, सच में, यार बहुत खूब। इस तरह मम्ता की किटी पाटी में काफी दारीफे होती है, वहीं दूर खड़ी तमन्ना भी ये सारी बातें सुन लेती है। इस मुस्कान ने तो मेरे नाख में दम कर दिया है इसने तो एक ड्रेस क्या बना दी लोग इसके कायल हो गये है कोई बात नहीं माजी की अनिवर्सरी दो दिन बाद आने वाली है मैं अपने लिए एक ऐसी ड्रेस देखूंगी कि लोग देखते ही रह जाएंगे और वैसा ही मैं माजी को भी गिफ्ट कर दूँगी इस बार मैं अपनी जिठानी से आगे होकर ही रहूंगी ऐसा सोचकर तमन्ना अपने आपको सहानुभूती देती है अब मम्ता की अनिवर्सरी में बस दो दिन बचे थे इसलिए तमन्ना अपने लिए ओनलाइन एक्सपेंसिव ड्रेसेज देखती है यार, पचास हजार की ड्रेस तो काफी चीप लगेगा हाँ, ये वाला बढ़िया है, नबे हजार वाला ये एक मैं अपने लिए और एक माजी के लिए ओडर कर देती हूँ ऐसा कहकर तमन्ना अपने और अपनी सास के लिए दो ड्रेस ओर्डर कर लेती है कुछ समय बाद तमन्ना बहु, एनिवर्सिरी में अब एक ही दिन बचा है तुमने अपने लिए ड्रेस ले ली अगर ना ली हो तो मैं तुम्हे शौपिंग कराने ले चलू नहीं नहीं माजी, आपको शौपिंग कराने की मुझे कोई जरूरत नहीं है मैंने पहले ही अपने लिए और आपके लिए भी एक बहुत अच्छा और महंगा ड्रेस खरीद लिया है वो कल तक डिलिवर भी हो जाएगा ऐसा बोलकर तमन्ना अपनी अमेरी का घमंड अपनी सास को दिखाती है और मसकान बहु, तू? वो माजी, मैं अपने लिए और आपके लिए भी एक बहुत सुन्दर ड्रेस सिल रही हूँ वो भी अपने हाथों से देख बहु, कहीं तु मेरी anniversary को खराब ना कर दे कुछ धंका पहन लो नहीं तो लोग तो यही कहेंगे कि एक बहु को मैंने सर पर चड़ा रखा है और दूसरी को मैंने अपने पैर की धूल समझ रखा है कहीं तु मेरी नाग मत कटवा दियो नहीं नहीं माजी ऐसा कुछ नहीं होगा आप बेफिक्र रहे हाँ हाँ देखते हैं ऐसा कहकर मम्ता वहाँ से चली जाती है अब एनिवर्सरी तो कल ही है मुझे जल्दी से अपने और माजी के लिए ड्रेस को पूरी तरीके से तयार करना होगा मुझे और भी खराब कपड़े और पुरानी साडियों की जरूरत पड़ेगी एक काम करती हूँ सारे कपड़े इकठा करती हूँ ऐसा कहकर मुस्कान खर के सारे कपड़ों को पहले इकठा करती है और फिर दोबारा से सिलाई करना शुरु करती है वहीं उसने पहले सही अपने पती से कुछ सजाने के लिए लहंगे के जड़ी गोट मंगवा रखे थे सारी चीज़े तयार करने के बाद वो जड़ी गोटन को भी लगा देती है और इस तरह से दो शामदार लहंगा बनकर तयार हो जाता है ऐसे ही अगले दिन एनिवर्सरी में सब ही लोग बस मुस्कान को ही देखते रह जाते हैं अरे वा मुस्कान बहु, तूने तो सच में कमाल कर दिया, क्या ड्रेस बनाया है इसने अरे मम्ता बहन सच में तेरी बहुत लाखों में एक है क्या घजब की कारी गरी पाई है इसमें सच में इसके सामने तो मेरा ये नबे हजार का ट्रेस भी फेल है पूरे पार्टी में बस मुस्कान ही अट्रेक्शन पॉइंट बनी हुई थी चारो और बस मुस्कान की ही बाते चल रही थी कुछ समय बाद मम्ता और उसका पती महेश एनिवर्सरी केक कट करने के लिए आते हैं और पार्टी को एंजॉय करते हैं वही सभी अपना अपना गिफ्ट देते हैं जहां तमन्ना के दिये हुए गिफ्ट से जादा मुस्कान के दिये हुए गिफ्ट को लोग और उसकी सास जाधा पसंद करते हैं ये सब देखकर तमनना काफी चेड़ जाती है और वो पार्टी छोड़ कर अपने कमरे में चली जाती है मुस्कान बहु, क्या तुम मेरे लिए भी ऐसी ड्रस बना सकती हो? हाँ हाँ चाची क्यों नहीं इसे बनाने में तो मैंने बस घर के रद्दी कपडों का इस्तमाल किया है तो बहुल अगे हाथ तो मेरा भी एक ड्रेस बना देना जितना चाहो मैं उतना पे कर सकती हूँ प्रतिक्षान के लिए मुस्कान रिगियर में रोक पड़ गया थी, सब्सक्राइब करने के लिए ग्रीत हो जाया और ख़ुशी खुशी रहने लगते हैं.
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